रोशन आरा

वो लड़की अब दिखाई नहीं देती
रोशन आरा  बाग़ में
मकबरे के सामने वाली घास पर
जो अपनी चप्पल अक्सर
भूल जाया करती थी
अपने गली के कसाइयों
और तेज़ खुशबू वाले इतर छिड़कती
औरतों को वो रोज़ सुबह
हलाल करती हुई
सीलमपुर से मेट्रो पकड़ती थी
औरतें उसके कपड़ों के बारे में बतियाते हुए
मई की दुपहरी काट देती थी
मेट्रो में खड़ी वो
आसमान के बारे में सोचने लगती थी
दिल्ली का आसमान कितना बरस पुराना है
किसने यहाँ पतंग न उड़ाई
किसने यहाँ गर्दन न उडाई
सीलमपुर से कश्मीरी गेट तक के सफ़र में
अपने कॉलेज के बारे में कम
उस लड़के के बारे में ज्यादा सोचती थी
जो रोशन आरा के मकबरे में
उसके इंतज़ार में
बरामदे में लेटे सोये
निठल्ले लोगों से
फालतू बातें कर रहा होगा
लाल संगमरमर की लाली समेटे
ये मकबरा उस लड़के की बेकारी का गवाह था
जो रोज़ उस महल की दीवारें घिसता रहता था

ये मकबरा उसके लिए सटीक था क्योंकि
दिल्ली के दुसरे मकबरे जहाँ प्रेमी जोड़ों से भरे रहते
यहाँ कोई नहीं आता
लड़का और लड़की रोशन आरा के इसी
कब्र के पास मिला करते थे
और सामने बैठे कबूतरों को
दाना खिलाया करते थे
लड़की उस कब्र से बतियाती थी
तो लड़का उस पर हँसता था
लड़की कहती है कि
रोशनारा  कब्र पर लेटी लेटी
उससे बातें करती हैं
लड़के को इस बात में कोई दिलचस्पी नहीं है
कि यहाँ इस कब्र में मुग़लों की एक
अनब्याही शहज़ादी सोती है
इन परकोटों पर फडफडाते कबूतरों को बीच
लड़की को शहज़ादी कि आवाज़ सुनाई देती है
रोशन आरा  लड़की से कहती है कि
वो न होती तो औरंगजेब भी न होता
मुग़ल बादशाहों सुन रहे हो तुम
अगर तुम्हारे हुक्म के मुताबिक
मुग़ल शह्जादियाँ निकाह नहीं कर सकती
तो तुम भी अपने अंजाम के लिए तैयार रहो
मुग़लों तुम्हे क्या लगा था
इस तरह तुम रोके लोगे
औरतों को
ताकि वे अपना नाम न लिख सकें
किसी इमारत पर
फलां इमारत शाहजहाँ ने बनाई
फलां हुमांयुं ने फलां बाबर ने
रोशन आरा नहीं सह सकती यह सब
वो अपना नाम जरूर लिखवायेगी 
भले ही उसके लिए उसे
औरंगजेब का साथ देना पड़े
लड़का बेकार है
लड़की नाराज़ है कि
वो एक आई पिल कि गोली
तक नहीं खरीद सकता
लड़का कहता है
 जिस दिन वो आई पिल की गोली
खरीदने लायक हो जाएगा
वो प्यार नहीं प्यार का दिखावा करेगा
लड़की के मन में कई सवाल आते हैं पर
वो कुछ पूछती नहीं
वो रोशन आरा कि बातें सुनने लगती है
सुनो औरंगजेब तुम्हे शाहजहाँ ने
शाहजहानाबाद बुलाया है
नहीं तुम्हारे क़त्ल का इन्तजाम करवाया है
तुम देहली कि देहरी न लांघना
और इस तरह औरंगजेब बच गया
एक औरत ने मुगलिया इतिहास बदल दिया

अपने पांच भाइयों और दो बहनों में
कहीं बीच की थी वो
अब्बा अब भी एक कपडे की दूकान के बाहर
दर्जी का काम करते हैं
और नमाज़ के पक्के हैं
बड़ा भाई लड़की के फोन का
कालर ट्यून बदल देता है
नए कालर ट्यून की आवाज़
मस्जिद की आवाज़ जैसी सुनाई देती है
यहाँ इस मकबरे में आकर
वो रोज़ बदल देती है अपना कालर ट्यून

सुनो औरंगजेब
अब दाराशिकोह को मरना ही होगा
मैं नहीं चाहती की कोई कवि
या दार्शनिक
बादशाह बनकर इतिहास में चमके
सुनो औरंगजेब
दारा शिकोह के लिखे पढ़े
सब को जला डालो
मुझे दारा शिकोह का सर चाहिए
सुना तुमने

वो लड़की चांदनी चौक में
साथ ले आती है रोशन आरा को
गोलगप्पे खाती है तो बुर्के में
गोलगप्पे का पानी छिटक जाता है
सहेलियां हंसती है उस पर
की इसे खाना नहीं आता गोलगप्पा
वो भीड़ में रिक्शे से चलती है तो
अचानक रोशन आरा रिक्शे से उतरकर
दौड़ने लगती है चांदनी चौक की सड़क पर

ये देखो ये देखो
वही चांदनी चौक जहाँ
दारा शिकोह को हथिनी पर बिठाकर
भिखारियों की तरह घुमाया गया
लोगों के थथुने फड़क रहे थे
औरतें छाती फाड़कर रोती थी
दारा शिकोह दारा शिकोह
हर गली चीखती थी
और अगले दिन
बिना सर के
दारा शिकोह की लाश
घूम रही थी चांदनी चौक में

लड़की कहती है कि आज भी
बिना सर के कई जिंदा लोग घुमते हैं
इसी चांदनी चौक में
जिसे लड़का नहीं मानता

मुग़लों सुन लो
मैंने पहली कालिख मल दी है
तुम्हारे नाम पर
अब मैं अट्टहास करुँगी
आसमान कंपा दूंगी
देहली मेरी है
मैं यहाँ की रानी हूँ

लड़का कहता है कि
वो भी एक दिन  मकबरा बनवाएगा
लड़की की याद में
लड़की कहती है
दिल्ली में जगह कहाँ बची
सब तरफ कहते हैं मेट्रो का जाल बिछेगा
मैं कहाँ लेटुगी
कैसे बनूँगी शहज़ादी

सुनो औरंगजेब
तुमने बहुत कुछ किया
अपनी बहन के लिए
पर मैं भी औरत हूँ
मुझे निकाह नहीं
पर इश्क करने का हक तो है ही
और यहीं तुम भाई से पुरुष बन जाते हो
पर इश्क तो होगा और कितनो से होगा
तुम इसका हिसाब नहीं लगा सकोगे

लड़की एक दिन अस्पताल में
भरती हो जाती है
लड़के की जेब फिर से खाली है
सरकारी अस्पताल से खबर उड़ जाती है
लड़की का भाई  लड़की से उसका
मोबाइल ले लेता है
और उसे कॉलेज छोड़ने
अब वो खुद जाता है
लड़की को अब दिल्ली का
मुगलई आसमान नहीं दीखता

सुनो औरंगजेब
अब मैं यहीं रहूंगी
इंतज़ार करुँगी कि कब तुम
मुझे और मेरे आशिक के लिए
चांदी के प्याले में ज़हर भेजोगे
मेरी कब्र यहीं बनेगी मेरे भाई
इसी महल में

किताबों में तुम्ही रहोगे
रोशन आरा नहीं रहेगी
क्योंकि तुम रहने नहीं दोगे
जब भी कोई लड़की अपना
नाम लिखवाना चाहेगी
तुम इसे मिटा दोगे
तुमने मुझे ज़हर खिला दिया
मुझे ख़ुशी है
मैंने वही ज़हर
हिन्दुस्तानी समाज में फैला दिया है

लड़का और लड़की दोनों की
लाश मिली है अखबार में
इसलिए वो लड़की दिखाई नहीं देती
अब रोशन आरा बाग़ में